हरी इलायची वज़न के हिसाब से सबसे महंगे मसालों में से एक है। इस मसाले के इतने महंगे होने का मुख्य कारण यह है कि इसे हाथ से तोड़ा जाता है। यह एक बहुत ही श्रमसाध्य हाथ से चुनने की प्रक्रिया है। भोजन के बाद हरी इलायची चबाने से साँसों में पुदीने की महक बनी रहती है क्योंकि यह मुँह के सामान्य बैक्टीरिया को मार देती है। दक्षिण भारत सदियों से सभी मसालों का जन्मस्थान रहा है। इलायची उन मसालों में से एक है जो मूल रूप से पश्चिमी घाट और दक्षिण भारत में पाए जाते थे। यूनानियों और रोमवासियों ने इसकी तीव्र सुगंध के लिए इसका उपयोग किया था, और यह इत्र और सुगंधित तेलों में मुख्य घटक रही है। हरी इलायची का उपयोग पाचन संबंधी समस्याओं, जैसे सीने में जलन, आंतों में ऐंठन, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS), दस्त, कब्ज, लिवर और पित्ताशय की समस्याओं और भूख न लगने के लिए किया जाता है।
पूछे जाने वाले प्रश्न
1. हरी इलायची क्या है?
हरी इलायची एक अत्यधिक सुगंधित और महंगा मसाला है जिसका उपयोग पाककला और औषधीय प्रयोजनों के लिए किया जाता है।
2. हरी इलायची इतनी महंगी क्यों है?
इसकी कटाई हाथ से की जाती है, जिससे यह प्रक्रिया श्रमसाध्य और महंगी हो जाती है।
3. हरी इलायची कहाँ उगाई जाती है?
यह मुख्यतः पश्चिमी घाट और दक्षिण भारत में उगाया जाता है।
4. हरी इलायची के स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?
यह पाचन, सीने में जलन, कब्ज, आईबीएस, यकृत संबंधी समस्याओं और भूख न लगने की समस्या में मदद कर सकता है।
5. क्या इलायची सांसों को ताज़ा कर सकती है?
जी हां, भोजन के बाद हरी इलायची चबाने से मुंह के बैक्टीरिया नष्ट होते हैं और सांसें ताजा रहती हैं।
6. प्राचीन काल में इलायची का उपयोग कैसे किया जाता था?
यूनानियों और रोमवासियों ने इसकी समृद्ध सुगंध के लिए इसका उपयोग इत्र और सुगंधित तेलों में किया।